एक माँ के शब्दों की अमर धरोहर

हर दोहे में
जीवन की एक सीख

प्रमिला सिंह की कलम से निकली रचनाओं का यह डिजिटल स्मृति-ग्रंथ उनके विचारों, आस्था और स्नेह को आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजता है।

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सहेजी हुई रचनाएँ
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रचना-वर्ष
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अनमोल स्मृतियाँ
श्रीमती प्रमिला सिंह

कलम और करुणा

श्रीमती प्रमिला सिंह

सहज भाषा, स्पष्ट नैतिक दृष्टि और अपने समय को ध्यान से देखना उनकी रचनाओं की विशिष्ट पहचान है।

प्रमिला सिंह की लेखनी आस्था और नीति तक सीमित नहीं थी; वह अपने समय की सजग दृष्टा भी थीं। साहित्यिक मंचों पर मिले एक शब्द को वे कभी राम और कृष्ण की कथा से जोड़तीं, कभी परिवार और संबंधों से, और कभी चुनाव, चंद्रयान, विश्व कप, मोबाइल फोन या बदलती तकनीक से।

उनके दोहे इसीलिए केवल उपदेश नहीं, बल्कि 2022 से 2024 के बीच देखे और महसूस किए गए जीवन की एक काव्यात्मक डायरी भी हैं। सहज अभिव्यक्ति, हल्का व्यंग्य और पौराणिक संदर्भों को वर्तमान जीवन से जोड़ना उनकी अपनी शैली थी। उनकी संजोई हुई रचनाओं को उसी आत्मीयता के साथ यहाँ एक स्मृति-पुस्तक का रूप दिया गया है।

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— प्रमिला सिंह